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Wednesday, October 9, 2013

हा छोटी छोटी खुशिया से ही हमे बड़ी खुशिया देती है

मैं राह चलते एक पत्थर मार रहा था
मैं पत्थर के पीछे वो मेरे आगे था
ऐसा लग रहा था मैं मद मस्त
आवारा की तरह हरकते कर रहा था
मैं अपनी धुन मे मस्त मुसकुराता हुआ बढ़ रहा था
मुझे क्या पता था वो मेरे मंज़िल तक वो पत्थर साथ देता रहेगा
वो तो एक बस खेल लग रहा था पर बहुत मज़ा आरहा था
पर उस पत्थर के उस खेल मे ऐसा कुछ नहीं था जो मुझे इतनी खुशी दे रहा था
वो तो बस मेरे दिमाग मे चल रहे उन यादों से दूर कर रहा था
जिनकी मुझे याद दिला रहा था
क्या पल भर की खुशी खुशी नहीं होती ?
हा छोटी छोटी खुशिया से ही हमे बड़ी खुशिया देती है
और मैं इन बड़ी खुशिया पाने के लिए ऐसी आवारगी करने मे कोई बैर और देर नहीं
और एक दिनभर की थकान मिटाने के लिए हल्की मुस्कान ही काफी है |


देवेंद्र गोरे

Wednesday, August 14, 2013

जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हू…!! :)

जिंदगी है छोटी, हर पल में खुश हू…

आज गाड़ी में जाने का वक्त नहीं है,
दो कदम चल के ही खुश हु…

आज किसी ए साथ नहीं है,
लैपटॉप पे मूवी देख के ही खुश हू…

आज कोई नाराज़ है,
उसके इस अंदाज़ में भी खुश हु…

जिसको देख नहीं सकता,
उसकी आवाज़ में हे खुश हू…

जिसको पा नहीं सकता,
उसकी याद में ही खुश हु…

बिता हुआ कल जा चूका है,
उसकी मीठी याद में खुश हू…

हस्ते हस्ते ये पल बीतेंगे,
ये सोच के ही खुश हू..

जिंदगी है छोटी पर हर पल में खुश हू..



अगर ये दिल को छू जाये तो कमेन्ट करना वरना में बिना कमेन्ट के भी खुश हू..   

- देवेंद्र गोरे !

Monday, July 29, 2013

ब्लॉग .......!!

तुम्हारा घर तुम्हारा  ब्लॉग,


मेरा घर मेरा ब्लॉग !


तुम मेरे घर आओ


मैं तुम्हारे घर आवउ


तुम मेरे पिछलग्गू (फालोअर) बनू


मैं तुम्हारा पिछलग्गू बनूँ;


यानि तुम मेरी पीठ खुजाओ 


मैं तुम्हारी पीठ खुजाऊँ !


ब्लॉगर ब्लॉगर भाई भाई 


ट्विटर ब्लॉगर लिंक बनाई !! 
देवेन्द्र गोरे 

Friday, June 21, 2013

अपने दर्द का बयां न
कभी न करना

बन जायेगा तमाशा।

अपनी ही गमों ने लोग हैरान हैं

अपनों की करतूतों से परेशान है

कर नहीं सकते किसी की

पूरी आशा।

किसी इंसान को

कुदरत हीरे की तरह तराश दे

अलग बात है

इंसानों ने कभी नहीं तराशा।
Devendra

मंज़िल मेरी फिर दूर नही....

मैं राही उन रास्तो का हूँ
जिन पर मेरा हक़ नही
एक सफर तेरे साथ हो तो
मंज़िल मेरी फिर दूर नही
ख्वाबो को सच करने का
हौसला मुझमे नही
एक बार तु मेरा हौसला बनजा
मंज़िल मेरी फिर दूर नही
समंदर जितना है गहरा
उतना गहरा है मेरा प्यार
आ चल मेरी कश्ति बनजा
मंज़िल मेरी फिर दूर नही
आसमॉ की आशा हैं
पंख लगाकर उड्ना है
आ चल तू बनजा पंख मेरे
मंज़िल मेरी फिर दूर नही
एक सफर मैं साथ चलू
तेरे कदमो के बाद चलू
तेरी परछाई बान जाउ अगर
मंज़िल मेरी फिर दूर नही
-: देवेंद्र गोर

Sunday, February 17, 2013

मंज़िल मेरी फिर दूर नही ....!!!

मैं राही उन रास्तो का हूँ 
जिन पर मेरा हक़ नही 
एक सफर तेरे साथ हो तो 
मंज़िल मेरी फिर दूर नही

ख्वाबो को सच करने का
हौसला मुझमे नही
एक बार तु मेरा हौसला बनजा
मंज़िल मेरी फिर दूर नही

समंदर जितना है गहरा
उतना गहरा है मेरा प्यार
आ चल मेरी कश्ति बनजा
मंज़िल मेरी फिर दूर नही

आसमॉ की आशा हैं
पंख लगाकर उड्ना है
आ चल तू बनजा पंख मेरे
मंज़िल मेरी फिर दूर नही

एक सफर मैं साथ चलू
तेरे कदमो के बाद चलू
तेरी परछाई बान जाउ अगर
मंज़िल मेरी फिर दूर नही

-: देवेंद्र गोरे