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Thursday, June 5, 2014

गज़ल ...!

हर मोड़ पर साथ दिया तुमने,य़े बदलाव क्यों है,
तुम ज़िन्दगी का मकसद ,फिर ये ठहराव क्यों है||

तलब रहती है अक्सर मिलने कि, ये दूरीया क्यों है ,
मिलते है हम अब भी अक्सर फिर ये अलगाव क्यों है||

उन्होने कहा कैसे हो तुम मैंने कहा तुम्हे फिक्र क्यों है ,
दिल में कहीं दुआओ का समुन्दर, लफ्ज़ो पर शिकायत क्यों है||

रिश्तो कि डोर इतनी कमजोर नहीं, फिर ये गांठ क्यों है,
प्यार का पैगाम लिये खड़ा हूं मैं, फिर ये खामोशी क्यों है ||

हमसे कोई पुछे ये चेहरे पर मुस्कान क्यों है,

और मैं मुस्कुराकर कह दूं ये प्यार क्यों है ||



3 comments:

  1. Bohot khoob... :) chua tera har lawz mere hotho ne phir mujhse ye parda kyu he...

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  2. 2nd stanza , bahut hi shandaar, cha gaye gore sahab !! :) :)

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