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Friday, January 2, 2015

मैं तो बस लिखना चाहता हूँ ....!!

ये क्या लिखा है ?
ये सच लिखा है,
किस ओर ये खत लिखा है
पढ़ना चाहता हूँ .
पढ़ाना चाहता हूँ ,
मैं तो बस लिखना चाहता हूँ !

क्या सोचती है ये दुनिया,
मैं ये न सोचता हूँ ,
क्या सुख क्या दुख.
क्या अमीरी क्या गरीबी,
सबकी बात कहना चाहता हूँ,
मैं तो बस लिखना चाहता हूँ !

पल में खुशी ,
पल में हँसी ,
पल में रोना ,
पल में खोना .
सारे रंग पिरोना चाहता हुँ,
मैं तो बस लिखना चाहता हूँ !

ये धर्म क्या अधर्म क्या .
मजहब की लड़ाई से हटना चाहता हूँ ,
दुर रखो मूूझे इस मंजर से ,
मैं तो बस लिखना चाहता हूँ !


एक दिन वो आयेगा ,
ख्वाब पूरा हो जायेगा ,
मैं भी दूनिया को कुछ दिखाना चाहता हूँ,
मैं तो बस लिखना चाहता हूँ !

$ देवेन्द्र गोरे $


2 comments:

  1. Likhte raho bhai !! :) Ek din duniya jarur dekhegi , keep it up ! :)

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  2. Very informative, keep posting such good articles, it really helps to know about things.

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